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Bihar Bridge Collapse List 2020–2026 with Cost, Government and Contractor DetailsComplete year-wise list of Bihar bridge collapse incidents from 2020 to 2026, including project cost, government, contractors and collapse details.

परिचय (Introduction)

साल 2020 से 2026 के बीच बिहार में कम से कम 33 पुल गिरने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। 1,710 करोड़ रुपये का अगुवानी-सुल्तानगंज पुल तीन बार ढहा, तो वहीं छोटे ग्रामीण पुल मानसून का दबाव सहन नहीं कर पाए। जून-जुलाई 2024 में अकेले 16 दिनों के भीतर 10 पुल गिर गए। पिछले 5 सालों में 26 पुल-पुलिया धराशायी होने की खबरें सामने आई हैं।

इस पूरी अवधि में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में रही, हालाँकि कुछ पुल पहले की सरकारों (राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली राजद सरकार) के कार्यकाल में बने थे। विपक्षी दलों ने इन घटनाओं के लिए भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।

पूरी सूची (Complete List)

क्र.वर्ष (Year)पुल / स्थान (Bridge / Location)लागत (Cost)सत्ता में सरकार (Government)ठेकेदार / एजेंसी (Contractor / Agency)घटना का प्रकार (Incident Type)
12026विक्रमशिला सेतु, भागलपुर (Vikramshila Setu, Bhagalpur)~₹838 करोड़ (कुल लागत)नीतीश कुमार सरकारउत्तर प्रदेश राज्य पुल निगम25 मीटर स्लैब गिरा (4 मई)
22025परमान नदी पुल, अररिया (Parman River Bridge, Araria)~₹3.80–4 करोड़नीतीश कुमार सरकारग्रामीण कार्य विभागपिलर धंसा (3 नवंबर)
32025घनश्याम स्थान पुल, जमुई (Ghanshyam Sthan Bridge, Jamui)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींबारिश में बह गया (3 अगस्त)
42025उलई नदी पुराना पुल, जमुई (Ulai River Old Bridge, Jamui)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींपुराना पुल ढहा (2 अगस्त)
52024अगुवानी–सुल्तानगंज पुल (तीसरी घटना) (Aguwani–Sultanganj Bridge – 3rd)₹1,710 करोड़नीतीश कुमार सरकारएसपी सिंगला कंस्ट्रक्शनतीसरी बार ढहा (17 अगस्त)
62024बकरा नदी पुल, अररिया (Bakra River Bridge, Araria)₹12 करोड़नीतीश कुमार सरकारनिजी ठेकेदारउद्घाटन से पहले गिरा (18 जून)
72024सिकटी/पदरिया पुल, अररिया (Sikti/Padariya Bridge, Araria)₹12 करोड़नीतीश कुमार सरकारनिजी ठेकेदारउपरोक्त के समान (डुप्लिकेट)
82024सुपौल कोसी पुल (भेजा–बकौर) (Supaul Kosi Bridge – Bheja–Bakaur)₹984–1,200 करोड़नीतीश कुमार सरकार (केंद्र: भारतमाला)गम्मन इंडिया और ट्रांसरेल1 मृत, 8 घायल (22 मार्च)
92024मधुबनी निर्माणाधीन पुल (Madhubani Under-construction Bridge)₹3 करोड़नीतीश कुमार सरकारग्रामीण कार्य विभागगर्डर गिरा (28 जून)
102024किशनगंज – मारिया नदी पुल (Kishanganj – Maria River Bridge)₹25 लाख–1.5 करोड़नीतीश कुमार सरकारग्रामीण कार्य विभागहिस्सा ढहा (27 जून)
112024किशनगंज – बुंदी नदी पुल (Kishanganj – Bundi River Bridge)₹15 लाखनीतीश कुमार सरकारएमपीएलएडी कोषबाढ़ के दबाव से ढहा (30 जून)
122024सीवान – महाराजगंज पुल (1998) (Siwan – Maharajganj Bridge)₹6 लाखनीतीश कुमार सरकारएमपीएलएडी कोषबारिश में ढहा (3 जुलाई)
132024सीवान – दरौंदा पुल (2004) (Siwan – Daraunda Bridge)₹10 लाखनीतीश कुमार सरकारएमपीएलएडी कोषबारिश में ढहा (3 जुलाई)
142024सीवान – गंडक नहर पुल (Siwan – Gandak Canal Bridge)₹10 करोड़नीतीश कुमार सरकारग्रामीण कार्य विभागढहा (22 जून)
152024सारण – सरैया पुल (एमएनआरईजीए) (Saran – Saraiya Bridge – MNREGA)₹7.5 लाखनीतीश कुमार सरकारएमएनआरईजीए कोषपानी के दबाव से ढहा (3 जुलाई)
162024सारण – लहलादपुर पुल (Saran – Lahladpur Bridge)₹22 लाखनीतीश कुमार सरकारपंचायती राज कोषगाद निकासी से ढहा (3 जुलाई)
172024सारण – ब्रिटिशकालीन पुल (Saran – British-era Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं80 साल पुराना पुल ढहा (3 जुलाई)
182024पूर्वी चंपारण निर्माणाधीन पुल (East Champaran Under-construction)~₹1.5 करोड़नीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींढहा (23 जून)
192024सहरसा – महिषी पुल (2005) (Saharsa – Mahishi Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकार (राबड़ी देवी के कार्यकाल में बना)सत्यापित नहींबाढ़ के दबाव से ढहा
202023अगुवानी–सुल्तानगंज पुल (दूसरी घटना) (Aguwani–Sultanganj Bridge – 2nd)₹1,710 करोड़नीतीश कुमार सरकारएसपी सिंगला कंस्ट्रक्शनदूसरी बार ढहा (4 जून)
212023पूर्णिया निर्माणाधीन पुल (Purnia Under-construction Bridge)₹1.13 करोड़नीतीश कुमार सरकारग्रामीण कार्य विभागकंक्रीटीकरण के 4 घंटे बाद ढहा (16 मई)
222023बिहटा–सरमेरा पुल (Bihta–Sarmera Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींनिर्माणाधीन ढहा (19 फरवरी)
232023सारण ब्रिटिशकालीन पुल (Saran British-era Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं2 घायल (19 मार्च)
242023दरभंगा आयरन ब्रिज (Darbhanga Iron Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींओवरलोड ट्रक से ढहा (16 जनवरी)
252022अगुवानी–सुल्तानगंज पुल (पहली घटना) (Aguwani–Sultanganj Bridge – 1st)₹1,710 करोड़नीतीश कुमार सरकारएसपी सिंगला कंस्ट्रक्शनपहली बार ढहा (30 अप्रैल)
262022नालंदा निर्माणाधीन पुल (Nalanda Under-construction Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं2 मजदूरों की मौत (18 नवंबर)
272022सहरसा निर्माणाधीन पुल (Saharsa Under-construction Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं3 मजदूर घायल (9 मई)
282022फतुहा पुराना पुल (ब्रिटिशकालीन) (Fatuha Old Bridge – British-era)₹1.47 करोड़ (एप्रोच रोड)नीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं136 साल पुराना पुल ढहा (20 मई)
292022सीवान नहर पुल (Siwan Canal Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींबारिश में ढहा
302022बेगूसराय पुल (Begusarai Bridge)₹13–14 करोड़नीतीश कुमार सरकारस्थानीय निर्माण कंपनीउद्घाटन से पहले ढहा (18 दिसंबर)
312020सत्तरघाट महासेतु (एप्रोच रोड) (Sattarghat Mahasetu – Approach Road)₹263.47–264 करोड़नीतीश कुमार सरकारविशिष्ट कंपनीउद्घाटन के 29 दिन बाद ढहा (15 जुलाई)
322020अररिया पुल (बकरा नदी – पहली घटना) (Araria Bridge – Bakra River – 1st)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहीं12 लोग नदी में गिरे
332020भागलपुर बाढ़ग्रस्त पुल ⚠️ (Bhagalpur Flood-affected Bridge)ज्ञात नहींनीतीश कुमार सरकारसत्यापित नहींसत्यापन लंबित

नोट: ⚠️ चिह्नित प्रविष्टियों का सत्यापन अभी बाकी है। कई 2024 की घटनाएँ छोटे ग्रामीण पुल थीं; कुछ एक ही पुल की अलग-अलग रिपोर्ट हो सकती हैं।

वर्ष-दर-वर्ष विवरण (Year-by-Year Detailed Description)

2026: विक्रमशिला सेतु हादसा (Vikramshila Setu Collapse)

4 मई 2026 को भागलपुर में गंगा नदी पर बने 4.7 किमी लंबे विक्रमशिला सेतु का 25 मीटर का स्लैब पिलर नंबर 133 के पास गंगा में गिर गया। यह पुल करीब 25 साल पुराना था और इसके निर्माण पर लगभग ₹838 करोड़ खर्च हुए थे। इसकी आधारशिला 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रखी थी और जुलाई 2001 में राबड़ी देवी के कार्यकाल में इसका उद्घाटन हुआ था।

हादसे के बाद आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हुई – लोगों को नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा। सेना ने बेली ब्रिज बनाकर यातायात बहाल किया। मार्च 2026 में ही पिलर 17, 18 और 19 की सुरक्षा दीवारें ढह चुकी थीं – जो इस हादसे के पहले से मौजूद खतरे के संकेत थे।

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार | निर्माण एजेंसी: उत्तर प्रदेश राज्य पुल निगम

2025: ग्रामीण पुलों का ढहना (Rural Bridge Collapses)

3 नवंबर 2025 – अररिया जिले में परमान नदी पर बना ₹3.80–4 करोड़ का पुल धंस गया। यह पुल 2019 में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा बनाया गया था और फारबिसगंज को पतेग्ना गाँव से जोड़ता था।

3 अगस्त 2025 – जमुई जिले के गिधौर प्रखंड में घनश्याम स्थान मंदिर के पास एक पुल (कल्वर्ट) तेज धारा में बह गया।

2 अगस्त 2025 – जमुई में उलई नदी पर बने पुराने, अनुपयोगी पुल का एक हिस्सा ढह गया।

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार (सभी घटनाएँ)

2024: संकट का वर्ष – 16 दिनों में 10 पुल (The Year of Crisis – 10 Collapses in 16 Days)

साल 2024 बिहार के लिए सबसे भयावह रहा। 18 जून से 4 जुलाई के बीच राज्य में 10 पुल गिरे।

18 जून – अररिया आपदा (Araria Disaster)

  • बकरा नदी पुल (₹12 करोड़): पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत बना यह पुल उद्घाटन से ठीक पहले ढह गया। निर्माण अप्रैल 2021 में शुरू हुआ था और जून 2023 में पूरा हुआ। तीन इंजीनियरों को निलंबित किया गया और ठेकेदार सिराजुर रहमान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

22 जून – सीवान में ढहा (Siwan Collapse)

  • गंडक नदी पर ₹10 करोड़ का पुल ढह गया। अधिकारियों के अनुसार, 40-45 साल पुराने इस पुल की नींव उथली थी, जो हालिया गाद निकासी से कमजोर हो गई थी।

23 जून – पूर्वी चंपारण (East Champaran)

  • ~₹1.5 करोड़ की लागत से बन रहा पुल ढह गया। स्थानीय लोगों ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल बताया।

27-30 जून – किशनगंज (Kishanganj)

  • मारिया नदी पुल (₹25 लाख–1.5 करोड़): 2011 में बना 70 मीटर का पुल मानसून के दबाव से ढह गया।
  • बुंदी नदी पुल (₹15 लाख): एक और पुल बाढ़ के दबाव में ढह गया।

28 जून – मधुबनी (Madhubani)

  • 75 मीटर लंबा, ₹3 करोड़ का निर्माणाधीन पुल – इसका गर्डर गिर गया। यह 9 दिनों में पाँचवीं घटना थी।

3-4 जुलाई – सीवान और सारण (एक दिन में चार पुल) (Siwan & Saran – Four in One Day)

  • सीवान – महाराजगंज पुल (₹6 लाख): 1998 में एमपीएलएडी कोष से बना।
  • सीवान – दरौंदा पुल (₹10 लाख): 2004 में एमपीएलएडी कोष से बना।
  • सारण – सरैया पुल (₹7.5 लाख): 2019 की एमएनआरईजीए परियोजना।
  • सारण – लहलादपुर पुल (₹22 लाख): पंचायती राज कोष से बना।
  • सारण – ब्रिटिशकालीन पुल: 80 साल पुराना पुल।

17 अगस्त – अगुवानी–सुल्तानगंज (तीसरी बार) (Aguwani–Sultanganj – Third Time)

₹1,710 करोड़ का यह महत्वाकांक्षी पुल तीसरी बार ढहा। पिलर 9 और 10 के बीच का सुपरस्ट्रक्चर गंगा में समा गया। आईआईटी-रुड़की के विशेषज्ञों ने डिज़ाइन में गड़बड़ी और घटिया सामग्री की बात कही थी, फिर भी विभाग ने एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन को दोबारा पुल बनाने की अनुमति दे दी।

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार (सभी घटनाएँ)

2023: आठ पुल ढहे (Eight Collapses)

तारीख (Date)पुल (Bridge)लागत (Cost)विवरण (Details)
16 जनवरीदरभंगा आयरन ब्रिजज्ञात नहींओवरलोड ट्रक से ढहा
19 फरवरीबिहटा–सरमेरा पुलज्ञात नहींनिर्माणाधीन ढहा
19 मार्चसारण ब्रिटिशकालीन पुलज्ञात नहीं2 घायल
16 मईपूर्णिया पुल₹1.13 करोड़कंक्रीटीकरण के 4 घंटे बाद ढहा
4 जूनअगुवानी–सुल्तानगंज (दूसरी बार)₹1,710 करोड़पिलर 9-11 पर स्लैब ढहे

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार (सभी घटनाएँ)

2022: पैटर्न साफ़ हुआ (The Pattern Emerged)

तारीख (Date)पुल (Bridge)लागत (Cost)विवरण (Details)
30 अप्रैलअगुवानी–सुल्तानगंज (पहली बार)₹1,710 करोड़पिलर 4-6 के बीच स्पैन ढहा
20 मईफतुहा पुराना पुल₹1.47 करोड़ (एप्रोच रोड)136 साल पुराना ब्रिटिश पुल ढहा
9 मईसहरसा पुलज्ञात नहीं3 मजदूर घायल
जूनसीवान नहर पुलज्ञात नहींबारिश में ढहा
18 नवंबरनालंदा पुलज्ञात नहीं2 मजदूरों की मौत
18 दिसंबरबेगूसराय पुल₹13–14 करोड़उद्घाटन से पहले ढहा

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार (सभी घटनाएँ)

2020: सत्तरघाट महासेतु विवाद (Sattarghat Mahasetu Controversy)

सत्तरघाट महासेतु – गंडक नदी पर 1.4 किमी लंबा यह पुल गोपालगंज को पूर्वी चंपारण से जोड़ता है। ₹263.47–264 करोड़ की लागत से बना यह पुल 16 जून 2020 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए उद्घाटित किया। मात्र 29 दिन बाद 15 जुलाई को इसका एप्रोच रोड ढह गया।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया – “263 करोड़ से 8 साल में बना लेकिन मात्र 29 दिन में ढह गया पुल”। उन्होंने ठेकेदार विशिष्ट कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की माँग की। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह मुख्य पुल नहीं बल्कि एप्रोच रोड था, लेकिन यह घटना सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी बनी।

उसी साल अररिया में बकरा नदी पुल पहली बार ढहा, जिसमें 12 लोग नदी में गिर गए।

सत्ता में सरकार: नीतीश कुमार सरकार | ठेकेदार: विशिष्ट कंपनी

मुख्य आँकड़े (Key Statistics)

  • कुल घटनाएँ (2020–2026): 33
  • सबसे महंगा ढहाव: अगुवानी–सुल्तानगंज पुल – ₹1,710 करोड़ (तीन बार ढहा)
  • सबसे ज़्यादा जान-माल का नुकसान: सुपौल कोसी पुल – 1 मृत, 8 घायल (2024)
  • सबसे भयावह वर्ष: 2024 – 16 दिनों में 10+ पुल
  • पूरी अवधि में सत्ता में: नीतीश कुमार सरकार

पुल गिरने के मुख्य कारण (Common Causes)

  1. घटिया निर्माण सामग्री – पूर्णिया (2023), अररिया (2024) और अगुवानी–सुल्तानगंज में इसका आरोप लगा। आईआईटी-रुड़की ने डिज़ाइन में गड़बड़ी की पुष्टि की।
  2. उथली नींव (Poor Foundation) – सीवान और सारण के 30-40 साल पुराने पुलों की नींव उथली थी, जो गाद निकासी से और कमजोर हुई।
  3. गाद निकासी (Desiltation) – सीवान और सारण में कई पुल गाद निकासी के कारण ढहे।
  4. मानसून का दबाव (Monsoon Pressure) – बाढ़ के कारण पुलों की संरचना कमजोर पड़ी।
  5. ओवरलोड वाहन (Overloaded Vehicles) – दरभंगा (2023) और फतुहा (2022) में ओवरलोड ट्रकों ने पुल गिराया।
  6. रखरखाव की कमी (Lack of Maintenance) – ब्रिटिशकालीन पुल वर्षों की उपेक्षा के कारण ढहे।

निष्कर्ष (Conclusion)

2020 से 2026 के बीच बिहार में पुल गिरने की 33 घटनाएँ कोई संयोग नहीं हैं – यह शासन व्यवस्था की विफलता है। अगुवानी–सुल्तानगंज पुल (₹1,710 करोड़) का तीन बार ढहना इस विफलता का सबसे बड़ा प्रतीक है। विक्रमशिला सेतु का ढहना, जिसके खतरे के संकेत पहले से मौजूद थे, एक और उदाहरण है।

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पूरी अवधि में सत्ता में रही। सरकार ने कुछ कार्रवाई की – 15 इंजीनियरों को निलंबित किया, ठेकेदारों को नोटिस जारी किए, निरीक्षण के आदेश दिए – लेकिन पुल गिरने का सिलसिला नहीं थमा

बिहार के लोग बेहतर के हकदार हैं – ऐसे पुल जो न गिरें, ऐसी सड़कें जो न बहें, और ऐसी सरकार जो सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीरता से ले। जब तक राज्य भ्रष्टाचार, लापरवाही, घटिया सामग्री और जवाबदेही की कमी जैसी जड़ समस्याओं का समाधान नहीं करता, बिहार के पुल गिरते रहेंगे – और जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ती रहेगी।


यह ब्लॉग द इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यूज़18, बीबीसी हिंदी, नवभारत टाइम्स और अन्य प्रतिष्ठित स्रोतों की रिपोर्टों पर आधारित है। ⚠️ चिह्नित प्रविष्टियों का सत्यापन अभी बाकी है।

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