श्री जगन्नाथ चालीसा
भगवान श्री जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी धाम में विराजमान हैं। श्री जगन्नाथ चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन को शांति, जीवन में सुख-समृद्धि तथा भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। भक्त विशेष रूप से रथ यात्रा, एकादशी और अन्य शुभ अवसरों पर इस चालीसा का पाठ करते हैं।
🌺 ॥ श्री जगन्नाथ चालीसा ॥ 🌺
॥ दोहा ॥
जय जगन्नाथ स्वामी, जय बलभद्र संभाव।
जय सुबद्रा ताई, अग्या करैं सब काज॥🪔 🪔 🪔
॥ चौपाई ॥
जय जगन्नाथ दयालु, दया निधान।
करुणा-रस सिंधु, हरहु अज्ञान॥🌸
कटकट धनुष विराजत शंखाधार।
मुख कमल सम, नयन मनोहर अपार॥🌸
कनकमय शीश, चारु चंद्र भाला।
नख-शिख छवि, शोभा अतिशय निराला॥🌸
अरुण मुकुट शोभित, दिव्य स्वरूप।
मुख में मुरली, वनमाला अनूप॥🌸
शंख, मृदंग, मधुर ताल सुहाई।
गदा धारण कर, कृपा बरसाई॥🌸
रक्ताम्बर, भूषण अति राजत।
नील स्वरूप, जग को सुखदायक॥🌸
आवत-धावत, शरण जो आवे।
सकल मनोरथ प्रभु पूर्ण करावे॥🌸
शची सहित भय सागर तारे।
वेद पुराण प्रभु महिमा धारे॥🌸
श्री जगन्नाथ चालीसा जो गावे।
संकट, शोक, क्लेश मिट जावे॥🌸
जो श्रद्धा से पाठ सुनावे।
जगन्नाथ प्रभु कृपा बरसावे॥🪔 🪔 🪔
॥ दोहा ॥
पवन तनय संकट हरण गोसाईं।
कृपा-दृष्टि करहु, पूर्ण करहु मन चाही॥🌼 ॥ जय जगन्नाथ स्वामी ॥ 🌼
🙏 जय बलभद्र प्रभु। जय माता सुभद्रा। 🙏
श्री जगन्नाथ चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन को शांति, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा तथा भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति, परिवार की सुख-समृद्धि, संकटों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए इस चालीसा का पाठ करते हैं। विशेष रूप से गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, रथ यात्रा तथा अन्य शुभ अवसरों पर इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।कता तथा आध्यात्मिक बल मिलने की मान्यता है।




